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Puri Book - Word by Word

नित्य कर्म प्रकाश (संपूर्ण विधि)

आर्य समाज की मान्य पुस्तक 'नित्य कर्म प्रकाश' पर आधारित दैनिक सन्ध्या, अग्निहोत्र (हवन), पञ्चमहायज्ञ और वैदिक मन्त्रों का शब्द-दर-शब्द प्रामाणिक संग्रह।

ब्रह्मयज्ञ (सन्ध्या विधि)

१. आचमन (Mantra for Sipping Water)

१. ओ३म् अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा। २. ओ३म् अमृतापिधानमसि स्वाहा। ३. ओ३म् सत्यं यशः श्रीर्मयि श्रीः श्रयतां स्वाहा।

विधि एवं व्याख्या (Procedure)

विधि: दाहिने हाथ की हथेली में 'गोकर्ण' मुद्रा बनाकर जल लें और प्रत्येक मन्त्र के साथ एक-एक बार जल पियें।

२. इन्द्रिय-स्पर्श (Mantra for Touching Senses)

१. ओ३म् वाङ्म आस्येऽस्तु। (मुख को) २. ओ३म् नसोर्मे प्राणोऽस्तु। (नासिका के दोनों छिद्रों को) ३. ओ३म् अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। (दोनों नेत्रों को) ४. ओ३म् कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। (दोनों कानों को) ५. ओ३म् बाह्वोर्मे बलमस्तु। (दोनों भुजाओं को) ६. ओ३म् ऊर्वोर्म ओजोऽस्तु। (दोनों जंघाओं को) ७. ओ३म् अरिष्टानि मेऽङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु। (समस्त शरीर पर जल छिड़कें)

विधि एवं व्याख्या (Procedure)

विधि: मन्त्र के साथ अंगों का स्पर्श करें। यह इन्द्रियों की शक्ति और पवित्रता हेतु है।

दैनिक यज्ञ एवं सन्ध्या का वैज्ञानिक महत्व

'नित्य कर्म प्रकाश' के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन को उन्नत बनाने के लिए पञ्च महायज्ञों का पालन करना चाहिए। सन्ध्या (ब्रह्मयज्ञ) से आत्मिक बल मिलता है और देवयज्ञ (हवन) से वायुमण्डल की शुद्धि होती है। यह ऋषि दयानन्द द्वारा प्रतिपादित एक पूर्ण वैज्ञानिक जीवन पद्धति है जो तन, मन और पर्यावरण को शुद्ध करती है।

  • पर्यावरण एवं वायु शुद्धि (Aromatherapy)
  • मानसिक एकाग्रता एवं शान्ति (Meditation)
  • आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार
Vedic Yagya

सत्य विद्या का प्रकाश
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आर्य समाज की इस महान विरासत को डिजिटल युग में सहेजने का हमारा यह प्रयास है। इन मन्त्रों का शुद्ध उच्चारण और नियमित अनुष्ठान आपके जीवन में सुख-समृद्धि लाएगा।

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